करीब दो साल बाद मिली राहत, यूएपीए जैसे गंभीर आरोपों के बीच अदालत ने कहा—जमानत दोषमुक्ति नहीं
हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को हुई चर्चित हिंसा के मामले में मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को उत्तराखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। यह फैसला न्यायमूर्ति आलोक वर्मा और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की डबल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनाया।है।
करीब दो साल से अधिक समय से जेल में बंद आरोपी को मिली इस राहत को न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। अदालत ने बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करते हुए जमानत मंजूर की। बचाव पक्ष का कहना था कि घटना के समय आरोपी घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, जिसे कोर्ट ने संज्ञान में लिया।
यह मामला शुरुआत से ही गंभीर धाराओं, जिनमें यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) भी शामिल है, के चलते बेहद संवेदनशील रहा है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका, साक्ष्यों की विश्वसनीयता और ट्रायल की प्रक्रिया विशेष महत्व रखती है।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है, बल्कि यह आरोपी को ट्रायल के दौरान कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने का अवसर देना है। लंबे समय तक विचाराधीन कैद (अंडरट्रायल) के पहलू को भी अदालत ने ध्यान में रखा।
अब यह मामला अपने अगले चरण,ट्रायल की ओर बढ़ेगा, जहां अदालत में गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में सभी की नजरें अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।गौरतलब है कि हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 8 फरवरी 2024 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हालात अचानक हिंसक हो गए थे। प्रशासन और पुलिस पर पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और कर्फ्यू जैसे कड़े कदम उठाए गए।
इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग घायल हुए थे, जबकि सरकारी और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए, जिनमें अब्दुल मलिक को मुख्य आरोपी बनाया गया और यूएपीए सहित अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई।मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना रहा और जांच एजेंसियां लगातार साक्ष्य जुटाने और आरोपियों की भूमिका तय करने में जुटी रहीं।अब, जमानत के बाद यह देखना अहम होगा कि ट्रायल के दौरान अदालत में क्या तथ्य सामने आते हैं और अंतिम फैसला किस दिशा में जाता है।


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