हल्द्वानी-बाट-माप विभाग के नाम पर फर्जीवाड़ा-नकली बिल बुक से व्यापारियों से अवैध वसूली का बड़ा खुलासा


बाट-माप विभाग के नाम पर फर्जीवाड़ा पर्दाफाश 

हल्द्वानी में विधिक माप विज्ञान (बाट-माप) विभाग के नाम पर फर्जी बिल बुक छपवाकर व्यापारियों से सत्यापन और मरम्मत शुल्क के नाम पर अवैध वसूली करने का बड़ा मामला सामने आया है। मामले का खुलासा तब हुआ जब मंगल पड़ाव क्षेत्र के एक स्वर्णकार ने डायल-112 पर एक व्यक्ति द्वारा अभद्रता किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की पूछताछ और विभागीय जांच के दौरान आरोपी के पास एक अधिकृत और दूसरी पूरी तरह फर्जी बिल बुक बरामद हुई, जिससे पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया।

➤रोहित एसोसिएट्स' के नाम से फर्जी बिल बुक छपवाकर सत्यापन और मरम्मत शुल्क के नाम पर की जा रही थी अवैध वसूली।
➤डायल-112 पर मिली शिकायत के बाद खुला राज, पुलिस और विभागीय जांच में सामने आया बड़ा खेल।
➤हल्द्वानी, भवाली, किच्छा, बाजपुर और दिनेशपुर समेत कई क्षेत्रों के व्यापारियों से वसूली के मिले साक्ष्य।
संयुक्त जांच टीम गठित, आरोपी पर धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में कार्रवाई।

जांच में सामने आया कि रामनगर के लखनपुर निवासी मनीष अपनी अधिकृत फर्म 'मनीष एसोसिएट्स' के साथ-साथ 'रोहित एसोसिएट्स' के नाम से फर्जी बिल बुक का इस्तेमाल कर व्यापारियों से सरकारी सत्यापन और मरम्मत शुल्क के नाम पर धनराशि वसूल रहा था। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 'रोहित एसोसिएट्स' नाम से विभाग में कोई लाइसेंसधारी मरम्मतकर्ता या पंजीकृत फर्म मौजूद ही नहीं है।प्रारंभिक जांच में हल्द्वानी, भवाली, किच्छा, बाजपुर, दिनेशपुर रोड, नेताजी नगर और जयनगर-01 समेत कई क्षेत्रों के व्यापारियों से अवैध वसूली के साक्ष्य मिले हैं। आरोप है कि वसूली गई रकम सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय आरोपी ने खुद हड़प ली।

कुमाऊं संभाग के प्रभारी उप नियंत्रक ललित मोहन पंत ने बताया कि 16 जुलाई को हल्द्वानी में मामला सामने आने के बाद 17 जुलाई को दिनेशपुर से भी शिकायत मिली। इसके बाद हल्द्वानी, किच्छा और बाजपुर के वरिष्ठ निरीक्षकों की संयुक्त जांच टीम गठित कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं संभाग में विभाग के 80 लाइसेंसधारी मरम्मतकर्ता पंजीकृत हैं, जबकि केवल हल्द्वानी में 13 अधिकृत मरम्मतकर्ता कार्यरत हैं।

विभाग ने व्यापारियों से अपील की है कि किसी भी सत्यापन या मरम्मत शुल्क का भुगतान करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान और विभागीय प्राधिकरण की पुष्टि अवश्य करें। फिलहाल जयनगर चौकी, दिनेशपुर के वरिष्ठ निरीक्षक की ओर से पुलिस को तहरीर सौंप दी गई है। आरोपी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी विभाग का नाम इस्तेमाल कर धोखाधड़ी, व्यापारियों से अवैध वसूली और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में कार्रवाई की जा रही है। विभाग का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की वसूली के प्रमाण मिलते हैं तो मामले में और धाराएं भी जोड़ी जाएंगी।

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