नियमों के विरुद्ध तीसरे व्यक्ति को किराए पर दी जा रही दुकानें, निगम की चुप्पी पर उठे सवाल

क्या है पूरा मामला?
सूत्रों की मानें तो कई दुकानदार खुद व्यापार नहीं कर रहे हैं, बल्कि दुकान को तीसरे व्यक्ति को किराए पर देकर हर महीने मोटी रकम वसूल रहे हैं। यानी निगम से कम किराए पर दुकान लेकर, उसे महंगे किराए पर आगे देना एक “कमाई का जरिया” बन चुका है।।
नियम क्या कहते हैं?
नियमों के मुताबिक, बिना अनुमति किसी तीसरे व्यक्ति को दुकान किराए पर देना (सबलेटिंग) पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कई जगहों पर यह खेल खुलेआम चल रहा है, जिससे नियमों की अनदेखी साफ नजर आती है। क्या नगर निगम को इस खेल की जानकारी नहीं है? अगर है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सरकारी संपत्ति से निजी मुनाफा कब तक चलता रहेगा?
संभावित कार्रवाई
अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित दुकानों का आवंटन रद्द किया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।अब देखना होगा कि नगर निगम इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है।नगर निगम की दुकानों में चल रहा यह खेल न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन लोगों के हक पर भी चोट है जो वास्तव में व्यवसाय करना चाहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन इस पर सख्त कदम उठाए। ।




0 टिप्पणियाँ