बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी को लेकर हुसैन ने रखा 72 घंटे का रोजा

  ईद पर जानवरों की कुर्बानी को बंद करने को लेकर प्रदर्शन कर रहा है अल्ताब-

पश्चिम बंगाल,आज देशभर में बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है,लेकिन इस बीच बंगाल में एक मुस्लिम शख्स ऐसा भी है जो ईद पर जानवरों की कुर्बानी को बंद करने को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। कोलकाता के 33 वर्षीय अल्ताब हुसैन ने ईद पर जानवरों की कुर्बानी के विरोध में मंगलवार की रात से 72 घंटे का रोजा रखा है।
अब आप घर बैठे ही हम से  पालिसी ले सकते हैं,तो जल्दी कॉल करें- 9897427220,  Star Health Insurance Uttarakhand-Haldwani ,Ruderpur,Nainital 

72 घंटे का उपवास यानी रोजा रखने का फैसला किया है-

जानकारी के अनुसार बकरीद के अवसर पर जब अल्ताब के भाई एक बकरे को कुर्बानी देने के लिए घर ले आए तो वह दुखी हो गए,एक प्रकाशित पेपर इंडिया टुडे की खबर के अनुसार, कुर्बानी का विरोध करने वाले अल्ताब हुसैन का कहना है कि लोगों में पशुओं के प्रति काफी क्रूरता है और कोई भी इसका विरोध नहीं कर रहा है। मैंने लोगों को यह एहसास दिलाने के लिए कि पशु बलि जरूरी नहीं है, 72 घंटे का उपवास यानी रोजा रखने का फैसला किया है। हुसैन ने बताया की 2014 में जब उन्होंने डेयरी उद्योग में पशुओं के प्रति क्रुरता पर एक वीडियो देखा तो पशु अधिकारों के लिए प्रचार करना शुरू किया।  उसके बाद से ही उन्होंने मांस खाना छोड़ दिया और शाकाहारी बन गए। इतना ही नहीं, उन्होंने चमड़े के उत्पादों का उपयोग करना भी बंद कर दिया हे।
हमारे न्यूज़ पोर्टल में विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें -9897427220,8279849405

मैं भी पशुओं की कुर्बानी में भाग लेता था,लेकिन एक वीडियो ने हुसैन को बदल दिया -

हुसैन ने आगे बताया की मैं भी पशुओं की कुर्बानी में भाग लेता था, लेकिन जब मैंने एक वीडियो में देखा कि कैसे गायों को पीठ पर लाठी से मारा जाता है, जिस तरह से उन्हें दूध देने के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं, कैसे गायों से बछड़ों को अलग करके बूचड़खाने भेजा जाता है, मुझे लगा कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए, यह डेयरी उद्योग से शुरू हुआ और पशु बलि के मुद्दे पर चला गया। मैं मांस, मछली, शहद या चमड़े के किसी भी उत्पादों का उपयोग नहीं करता।

अपने घर से ही करि शुरुवात -

तीन साल पहले भी हुसैन के भाई घर में ईद के मौके पर कुर्बानी देने के लिए जानवर लाए थे, तब उन्होंने विरोध किया था और किसी तरह वह उस साल जानवर को बचाने में सफल हो पाए थे। हालांकि, उनका परिवार हुसैन का समर्थन नहीं करता और वह मानते हैं कि ईद पर कुर्बानी जरूरी है। हुसैन को जानवरों के प्रति प्रेम दिखाने की सजा यह हुई कि उन्हें धमकियां मिलने लगीं। हुसैन का कहना है कि जब से उन्होंने पशुओं के खिलाफ हो रहे क्रुरता पर बोलना शुरू किया, उन्हें सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने लगीं,लेकिन अब कई लोग उनको समर्थन कर रहे हैं।
Advertize with us,call now-  9897427220,8279849405

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ