बच्चों की सुरक्षा पर दोहरे मापदंड क्यों? निजी स्कूलों पर कार्रवाई,सरकारी स्कूलों पर सवाल..सुरक्षा ऑडिट पर बड़ा सवाल

क्या सरकारी स्कूलों में हैं सीसीटीवी,फायर सेफ्टी और आपदा प्रबंधन के इंतजाम को लेकर होगा निरीक्षण??

हल्द्वानी,बीते दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में कोचिंग सेंटरों और स्कूलों में हुए भीषण अग्निकांडों ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कई मासूम छात्रों की जान खतरे में पड़ी और कई परिवारों को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ी। इन घटनाओं के बाद अब नैनीताल जिला प्रशासन निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के सुरक्षा ऑडिट की तैयारी में जुट गया है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है।

➤क्या सुरक्षा के नियम सिर्फ निजी स्कूलों तक सीमित रहेंगे?
➤क्या जिले के सभी सरकारी स्कूलों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम हैं?
➤क्या हर सरकारी स्कूल सीसीटीवी कैमरों से लैस है?
➤क्या आपदा प्रबंधन के लिए नियमित मॉक ड्रिल और सुरक्षा प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं?
➤और सबसे बड़ा सवाल, क्या सरकारी स्कूलों का भी इसी तरह सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा?

हकीकत यह है कि जिले के कई सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कहीं अग्निशमन यंत्र नहीं हैं, तो कहीं सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर खामियां सामने आती रही हैं।जब बात बच्चों की सुरक्षा की हो, तो निजी और सरकारी स्कूलों में फर्क नहीं होना चाहिए। हर बच्चे की जान बराबर कीमती है और सुरक्षा के नियम भी सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन निजी संस्थानों के साथ-साथ सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की भी पड़ताल करता है या नहीं, क्योंकि सवाल सिर्फ ऑडिट का नहीं, बल्कि हर बच्चे को सुरक्षित शिक्षा का अधिकार देने का है।

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