उत्तराखंड के जंगलों में AI की 'एंट्री
उत्तराखंड के जंगलों में AI की 'एंट्री': हल्द्वानी वन प्रभाग ने पहली बार पेड़ों पर लगाएअकूस्टिक रिकॉर्डर ; पक्षियों की आवाज सुनकर ही उनकी प्रजाति बता देगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
हल्द्वानी : उत्तराखंड का वन विभाग अब जंगलों में छिपे वन्यजीवों और पक्षियों की निगरानी के लिए हाईटेक हो गया है। सूबे में पहली बार हल्द्वानी वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले जंगलों में'अकूस्टिक रिकॉर्डर' डिवाइस (ध्वनि यंत्र) लगाए गए हैं। इस अनूठी तकनीक के जरिए अब पक्षियों को बिना देखे, सिर्फ उनकी चहचहाहट और आवाज के आधार पर उनकी सटीक प्रजाति का पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए वन विभाग 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) तकनीक का सहारा ले रहा है।
नंधौर अभ्यारण्य में शुरू हुआ अनूठा प्रयोग-
यह देश और प्रदेश के चुनिंदा प्रयोगों में से एक है,जिसे पहली बार हल्द्वानी डिवीजन के अंतर्गत 'नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य' में अमलीजामा पहनाया गया है। नंधौर अभ्यारण्य हमेशा से ही देशी-विदेशी पक्षियों के प्रवास के लिए सबसे मुफीद जगहों में से एक रहा है। यही वजह है कि सालभर यहां बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी (बर्ड वॉचर्स) पहुंचते हैं। अब इस नए प्रयोग से यहां पक्षियों के संरक्षण और उनकी गणना में एक नई क्रांति आने की उम्मीद है। वन विभाग जंगलों में 'वाइल्डलाइफ अकूस्टिक रिकॉर्डर' नामक डिवाइस का इस्तेमाल कर रहा है। इन डिवाइसेस को पेड़ों और पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के पास लगाया जाता है। यह डिवाइस 24 घंटे पक्षियों की आवाजों को रिकॉर्ड करती है। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर के माध्यम से उस आवाज का मिलान डेटाबेस से किया जाता है। पलक झपकते ही AI तकनीक यह पहचान लेती है कि वह आवाज किस प्रजाति के पक्षी की है। इससे उन दुर्लभ पक्षियों का भी पता चल सकेगा, जो घने जंगलों में इंसानी नजरों से छिपे रहते हैं।।


एक हफ्ते में ही मिले चौंकाने वाले नतीजे-
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य में इस तकनीक का एक हफ्ते का ट्रायल किया गया, जिसके बेहद सकारात्मक और चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। महज एक हफ्ते के भीतर ही इस वॉइस डिवाइस और AI तकनीक के माध्यम से 140 से अधिक अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों की पहचान की जा चुकी है नंधौर में मिली शुरुआती सफलता के बाद अब विभाग इस योजना को बड़े स्तर पर विस्तार देने जा रहा है। 

हल्द्वानी डिवीजन के अंतर्गत आने वाली सभी 5 रेंजों में इन 'अकूस्टिक रिकॉर्डर' डिवाइसेस को लगाया जाएगा। इसके बाद पूरे डिवीजन में मौजूद पक्षियों की प्रजातियों का एक सटीक डिजिटल डेटाबेस तैयार हो सकेगा जो भविष्य में वाइल्डलाइफ रिसर्च और पर्यावरण संतुलन को समझने में मील का पत्थर साबित होगा।। 


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