साल 2016 में उजागर हुआ था एनएच 74 घोटाला
बहुचर्चित एनएच 74 घोटाला एक बार फिर से सुर्खियों में है। ईडी के देहरादून उपक्षेत्रीय कार्यालय ने एनएच-74 घोटाले से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार किसानों की लगभग 13.89 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है।
दरअसल, 10 मार्च 2017 को तत्कालीन एडीएम प्रताप शाह ने इस घोटाले में पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की विवेचना तत्कालीन सीओ सिटी स्वतंत्र कुमार को सौंपी गई थी। इस मामले में सात पीसीएस अफसर सहित 12 के अधिक अधिकारी, कर्मचारी सस्पेंड हुए थे। इसके अलावा 30 से अधिक सरकारी कर्मी, दलाल, किसानों को जेल भेजा गया था। इस मामले में ईडी ने जांच की थी।
इस जांच में सामने आया था कि किसान दिलबाग सिंह, जरनैल सिंह, बलजीत कौर, दलविंदर सिंह ने कथित रूप से राजस्व अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से भूमि अभिलेखों में हेरफेर कर उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 143 के आदेश बैक डेट में कराए थे। इसके बाद 26 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त मुआवजा लिया था। आरोपियों ने एनएच-74 चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित भूमि पर गैर-कृषि दर से मुआवजा प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया। जिससे सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। आरोपियों ने धनराशि का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में, विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करने में, रिश्तेदारों के खातों में राशि स्थानांतरित करने में किया गया।
बुधवार को इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने लगभग 13.89 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क करने का अंतरिम आदेश जारी किया है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है। अवैध संपत्तियों की पहचान होने पर अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है।






0 टिप्पणियाँ