वोटर लिस्ट में मतदाताओं के नाम गायब होने पर बौखलाए बल्यूटिया,बोले ऐसे अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुकदमा होना चाहिए दर्ज

संवैधानिक मत देने के अधिकार से किया वंचित,आता हे दंडनीय अपराध की श्रेणी में-

हल्द्वानी,निकाय चुनाव 2025 को लेकर जहां आज प्रदेश में मतदाता अपने मत का प्रयोग कर लोकतंत्र का हिस्सा बने तो वहीं कई मतदाताओं के वोटर लिस्ट से नाम ही गायब मिले, जिसको लेकर काँग्रेस प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बेवजह हजारों की संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा कर उन्हें उनके संवैधानिक मत देने के अधिकार से वंचित किया गया जो कि दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। 

भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का नेता चुनने का देता हे अधिकार -

भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का नेता चुनने का अधिकार देता है, लेकिन आज निकाय चुनाव में ऐसे हजारों की संख्या में लोगों के नाम बेवजह वोटर लिस्ट से काट दिए गए जिन्होंने पूर्व चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

एक तरफ अधिक मतदान करने की अपील तो वहीं दूसरी ओर वोटर लिस्ट से नाम नदारत-

एक तरफ चुनाव आयोग व अधिकारीगण जनता से अधिक से अधिक मतदान की अपील करते हैं दूसरी तरफ जब लोग अपने मत देने मतदान केंद्र पहुँचे तो निराश व मायूस होकर घर लौटने को मजबूर थे,क्योंकि उनका नाम बिना उनकी सहमति व जानकारी के वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था,जिसकी पूरी जिमीदारी चुनाव आयोग व संबंधित अधिकारियों की है जिन्होंने उनके संवैधानिक अधिकार छीनने का काम किया और ऐसे अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज होना चाहिए जिन्होंने जनता के मताधिकार को छीनने का काम किया।

 पिछले 10 वर्षों में इस शहर ने जो खोया है, उसे हम वापस लाएंगे-

रैली के समापन पर में ललित जोशी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा, यह चुनाव मैं नहीं, बल्कि आप लड़ रहे हैं। आपका यह उत्साह और समर्थन दर्शाता है कि हल्द्वानी बदलाव चाहता है। पिछले 10 वर्षों में इस शहर ने जो खोया है, उसे हम वापस लाएंगे। इस चुनाव में जाति, धर्म और झूठे वादों की राजनीति नहीं चलेगी। अब हल्द्वानी केवल विकास, रोजगार और उज्ज्वल भविष्य की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में शहर के विकास की अनदेखी हुई है। नगर निगम में ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल तो किया गया, लेकिन उनके विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यही वजह है कि ग्रामीण जनता में भारी असंतोष है, और इसका जवाब वह 23 जनवरी को अपने वोट से देगी।




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