जनता के मेहनत के रुपयों को निजी कंपनियों द्वारा बिजली बिल के नाम पर लुटवाने की तैयारी में हे सरकार-
स्मार्ट मीटर में खपत से ज्यादा आ रहा है बिजली बिल-
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से स्मार्ट मीटर के विरोध की खबरें आ रही हैं। विभिन्न राज्यो में जहां स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहाँ उपभोक्ताओं की शिकायत का अंबार है कि स्मार्ट मीटर में खपत से ज्यादा बिजली बिल आ रहा है। उपभोक्ता बिजली बिल के बीच पिस रहे और त्राहिमाम कर रहे हैं। सरकारें भी उपभोक्ताओं के समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रही है। उपभोक्ता को नहीं पता कि स्मार्ट मीटर के पीछे कौन है, किसकी कंपनी है, इसकी प्रमाणिकता क्या है और क्यों केंद्र इसे लगाने के लिए राज्यों पर शर्तें थोप रहा है।

उपभोक्ता से रखरखाव का खर्चा तक किश्तों में वसूला जाएगा-
मीटर लगाने को राज्य से दादागिरी की जा रही,मीटर लग जाएगा तो उपभोक्ता के साथ दादागिरी होगी-
सोचनीय है की अभी मीटर लगाने के लिए राज्य से दादागिरी की जा रही है, फिर मीटर लग जाएगा तो उपभोक्ता के साथ दादागिरी होगी। क्या जनता को पता है कि इस मीटर के डेटा का राजनीतिक इस्तेमाल किस तरह से होगा? इस डेटा से बिजली क्षेत्र में किस तरह का सुधार आएगा?श्री आर्य ने कहा कि जिन राज्यों में अभी तक स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे है गरीब लोगों के लिए बिजली बिल चुकाना मुश्किल साबित हो रहा है। बगैर कोई सूचना के बिजली काट दी जाती है। लोगों को बिजली के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाना चाहती है। कांग्रेस की माँग है इस निर्णय को लागू करने से पहले जनभावनाओ को समझना होगा और जिस प्रकार अन्य राज्यों में इसका विरोध हो रहा है और एक बीजेपी के प्रिय निजी घराने को लाभ पहुँचाने के लिए ये योजना सरकार लागू करने जा रही है इस योजना का पुरजोर विरोध किया जाएगा।






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